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सृष्टि की सर्वोत्तम रचना!

सृष्टि | Nature | रचना | Creation | 06th June 2022 | Virtual Wire

 

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मनुष्य की रचना इस संसार मे रचनाकार की उत्कृष्टतम रचना है। दया ,ममता,प्रेम,करुणा वगैरह-वगैरह से इसे नवाज़ा गया और मनुष्यता का नाम देकर उसे संसार मे विस्तार हेतू छोड़ दिया गया।

मनुष्य का दिमाग बहुत ही शक्ति शाली है। वह बहुत ऊँचा और दूर तक सोच सकता है। तभी तो वह अपनी आवश्यकतानुसार नित नये आविष्कार करता रहा और धरती पर जीवन को सुगम बनाता गया। पर अचरज इस बात का है कि वह मनुष्यता को पीछे छोड़ता गया। सुख सुविधाओं और ठाठ-बाट से लैस जीवन मनुष्यता के अभाव मे एकदम बेस्वाद और उदासीन हो गया।


आज वह स्वयं अपने आप से ही दूर है,अपनी खुशियों को यहाँ-वहाँ ढ़ूढ़ता है और परेशान रहता है। स्वार्थ वश प्रकृति को रौंदता रहा और आज उसी के रोष का भी कारण बन बैठा है। मनुष्य के व्यक्तिगत,पारिवारिक देशी और विदेशी रिश्तों की मधुरता ना जाने कहाँ गायब हो गयी है और उसकी जगह पर ईष्या,द्वेष,छल प्रप॔च के कारण कड़वाहट ने जगह बना ली है जाने किस अंधी दौड़ मे एक दूसरे को नीचा दिखाने मे लगे है सब। और स्वयं ही अपना पतन का कारण बन रहे है।

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मनुष्य यह अच्छी तरह जानता है कि वह मरणशील है और मानव जाति के साथ साथ-साथ जीव जन्तु, पशु पक्षी और वनस्पति जगत का उत्थान ही उसके जीवन का लक्ष्य है फिर भी ऐसा लगता है मानो उसने अपनी बुद्धि को ताले मे बन्द कर रख्खा है और चाबी स्वयं के पास होते हुये परेशान सा घूमता है। ऐ मनुष्य अब भी समय है तू चेत जा वरना तेरा जो हश्र होगा वो शब्दों मे बयां कहाँ होगा।





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